नई दिल्ली : हमारा शरीर स्वस्थ रहें ये हर कोई चाहता हैं। और हमारा शरीर तभी स्वस्थ रहेगा जब हमारे शरीर के सभी अंग स्वस्थ रहेंगे। हमारे शरीर में गुर्दा ( किडनी ) भी एक महत्वपूर्ण अंग हैं। जिसकी सेहत का विशेष ख्याल रखने की आवश्यकता होती है। और हर साल दुनिया भर में लोग मार्च के दूसरे गुरुवार को विश्व गुर्दा दिवस (World Kidney Day) मनाते हैं। और इस साल यह दिन 10 मार्च को मनाया जा रहा है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य किडनी से संबंधित बीमारियों की बढ़ती संख्या के बारे में दुनिया भर के लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन गुर्दे की बीमारियों को रोकने के लिए विभिन्न रणनीतियों की आवश्यकता पर भी ज़ोर देता है।

गुर्दे ( किडनी ), शरीर की कोशिकाओं द्वारा उत्पादित एसिड को हटाने के साथ रक्त में नमक, पानी और खनिजों जैसे कैल्शियम, फास्फोरस, सोडियम और पोटेशियम के स्वस्थ संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा हमारे शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालने का काम भी करता है।

जॉगिंग या तेज़ चलना हो सकता है मददगार

WHO की सलाह के अनुसार, वयस्कों को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम-तीव्रता या कम से कम 75 मिनट तक तेज़ चलना या जॉगिंग करनी चाहिए। इस स्टडी में पाया गया कि किडनी की बीमारी से पीड़ित लोग जिनकी गतिविधि का स्तर डब्ल्यूएचओ से कम से कम दो गुना अधिक था, लगभग दो वर्षों तक स्वस्थ रहे। सक्रिय बने रहना महत्वपूर्ण था।

क्या राज़ाना वर्कआउट है फायदेमंद?

रोज़ाना वर्कआउट करने के बहुत सारे फायदे होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों को भी फायदा पहुंचा सकता है? एक शोध के अनुसार, जो नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करते हैं, गुर्दे की बीमारी उन लोगों में कम प्रगति करती है। साथ ही उन्हें जीवन में सुधार होता है और दिल से जुड़ी समस्याएं भी कम होती हैं। किडनी के मरीज़ों से जुड़ी इस तरह की पहली स्टडी विश्व किडनी दिवस के दिन यूरोपीय जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित हुई हैं।

मृत्यु का जोखिम कई गुना बढ़ाता है क्रोनिक किडनी रोग

क्रोनिक किडनी रोग में मांसपेशियों में कमी आने की वजह से शारीरिक निष्क्रियता हो जाती है, जिससे दिल की बीमारी का ख़तरा बढ़ जाता है, जो इन रोगियों में मृत्यु का मुख्य कारण भी है। क्रोनिक किडनी रोग दुनिया भर में लगभग 700 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है। एक बार ये क्रोनिक किडनी रोग अपने अंतिम चरण में पहुंच जाए, तो सामान्य लोगों की तुलना में हृदय की बीमारी से मृत्यु का जोखिम 10-20 गुना अधिक हो जाता है।

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