सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश की सभी महिलाओं को गर्भपात (Legal Abortion) का अधिकार दे दिया, चाहें वो विवाहित हों या अविवाहित। इस ऐतिहासिक फैसले में शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मेडिकल र्टिर्मनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत 24 सप्ताह में गर्भपात का अधिकार सभी को है। इस अधिकार में महिला के विवाहित या अविवाहित होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

मैरिटल रेप को भी माना आधार-
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी महिला की वैवाहिक स्थिति को उसे अनचाहे गर्भ गिराने के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं बनाया जा सकता है। एकल और अविवाहित महिलाओं को भी गर्भावस्था के 24 सप्ताह में उक्त कानून के तहत गर्भपात का अधिकार है।

SC ने अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 20-24 सप्ताह के बीच का गर्भ रखने वाली अविवाहित गर्भवती महिलाओं को गर्भपात करने से रोकना और विवाहित महिलाओं को ऐसी स्थिति में गर्भपात की इजाजत देना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है. 1971 में जब एमटीपी अधिनियम बनाया गया था, तो यह काफी हद तक विवाहित महिला से संबंधित था, लेकिन जैसे-जैसे सामाजिक मानदंड और रीति-रिवाज बदलते हैं, कानून को भी अनुकूल होना चाहिए।

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