Google Doodle Today: सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल ने आज (25 जून 2022) बेहद खास डूडल बनाया है, जिसे देखने के बाद हर कोई इस डूडल में दिख रही लड़की के बारे में जानना चाहता है, तो चलिए आपके इस सवाल का जवाब देते हैं। दरअसल, गूगल ने प्रसिद्ध Anne Frank को उनकी डायरी के प्रकाशन की 75वीं एनिवर्सरी के मौके पर डूडल बनाकर याद किया है।

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गूगल ने एक एनिमेटेड स्लाइड शो के जरिये दी श्रद्धांजलि
इस मौके पर (आज के गूगल डूडल) गूगल ने एक एनिमेटेड स्लाइडशो के जरिये उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस स्लाइड शो में उनके जीवन से जुड़ी सच्ची घटनाओं को दर्शाया गया है। इसके साथ ही स्लाइड शो के जरिए प्रसिद्ध यहूदी जर्मन-डच डायरिस्ट और होलोकॉस्ट पीड़ित ऐनी फ्रैंक को सम्मानित किया।

आज के गूगल डूडल में क्या है खास?
डूडल आर्ट डायरेक्टर Thoka Maer द्वारा बनाए गए 14 स्लाइड्स में Anne की डायरी के रियल हिस्सों को दिखाया गया है। ये बताते हैं कि उन्होंने, उनके दोस्तों और परिवार ने दो साल से अधिक समय तक क्या-क्या सहा था। इस डायरी को ऐनी ने 13-15 साल की आयु के बीच लिखा था। गूगल ने बताया है कि उनके द्वारा लिखी गई यह डायरी आजतक होलोकॉस्ट और युद्ध की घटनाओं के बारे में सबसे व्यापक रूप से पढ़ी जाने वाली डायरियों में से एक है। आज उनकी डायरी के प्रकाशन की 75वीं वर्षगांठ है। इसका मतलब है कि आज उनकी डायरी को छपे हुए 75 साल हो गए हैं। इसे व्यापक रूप से आधुनिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण किताबों में से एक माना जाता है।

कौन थीं Anne Frank?
ऐनी फ्रैंक का जन्म 12 जून, 1929 को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में हुआ था। जब वह 4 साल की थी तो जर्मन पर नाजियों का कंट्रोल हो गया। बढ़ती नाजी पार्टी के हाथों लाखों अल्पसंख्यकों को भेदभाव का सामना किया। भेदभाव और हिंसा से बचने के लिए ऐनी का परिवार नीदरलैंड चला गया। जब ऐनी 10 साल की थी, तब द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई और इसके तुरंत बाद जर्मनी ने नीदरलैंड पर आक्रमण कर दिया। यहूदी लोगों को विशेष रूप से नाजी शासन द्वारा लक्षित किया गया था।

13-15 साल की आयु में ऐनी ने लिखी एक डायरी
13-15 साल की आयु में ऐनी ने एक डायरी लिखी। इसका नाम द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल रखा गया था। इसे आमतौर पर द डायरी ऑफ ऐनी फ्रैंक के नाम से भी जाना जाता है। ऐनी फ्रैंक अपनी डायरी को दोस्त की तरह मानती थी। अपनी डायरी को वे किटी कहती थी। उन्होंने अपनी उस डायरी में उन सभी घटनाओं के बारे में लिखा, जो उनके जीवनी में हुईं।

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4 अगस्त, 1944 को फ्रैंक परिवार को नाजी सीक्रेट सर्विस ने पकड़ी
4 अगस्त, 1944 को फ्रैंक परिवार को नाजी सीक्रेट सर्विस ने पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें एक निरोध केंद्र में ले जाया गया। यहां उन्हें कड़ी मेहनत करने के लिए मजबूर किया गया। फिर उन्हें पोलैंड में ऑशविट्ज एकाग्रता शिविर में भेज दिया गया। कुछ महीने बाद ऐनी और मार्गोट फ्रैंक को जर्मनी के बर्गन-बेल्सन एकाग्रता शिविर में ले जाया गया। नाजी बलों द्वारा कैदियों की क्रूर हत्याएं की गईं। साथ ही घातक बीमारियां भी तेजी से फैलने लगीं। इन सब से जूझते हुए अंत में ऐनी और मार्गोट ने दम तोड़ दिया। जब Anne की मृत्यु हुई तब वह महज 15 साल की थी।

” दी डायरी ऑफ ऐनी फ्रैंक’ को 80 भाषाओं में किया गया ट्रांसलेट
भले ही Anne होलोकॉस्ट के दौरान नहीं बच पायी लेकिन उनकी लिखी हुई डायरी ” दी डायरी ऑफ ऐनी फ्रैंक’ आज तक की।सबसे बड़ी नॉन फिक्शन किताब बनकर प्रकाशित की गयी। इस किताब को 80 भाषाओं में ट्रांसलेट किया गया और स्कूलों में बच्चों को इसके बारे में पढ़ाया भी जाने लगा।

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