दुनियाभर में महंगाई अपने चरम पर है। वहीं देश की इकोनॉमिक ग्रोथ (आर्थिक विकास) भी लगातार कमजोर पड़ रही है। ऐसे में कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में आर्थिक मंदी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इस बीच एक के बाद एक कई कंपनियां लोगों को नौकरी से निकाल रही है। तो क्या इसे आर्थिक मंदी की आहट माना जाए। ताजा मामला पुरानी कारें बेचने वाली एक ई-कॉमर्स कंपनी का है।

Cars24 ने की 600 लोगों की छंटनी
E-कॉमर्स कंपनी Cars24 ने 600 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। हालांकि इस बारे में कंपनी का कहना है कि ये उसके कारोबार करने की सामान्य प्रक्रिया है। वह हर साल प्रदर्शन के आधार पर कर्मचारियों की छंटनी करती है, ये भी उसी का हिस्सा है। इसका कंपनी की लागत घटाने से कोई लेना-देना नहीं है। Cars24 के कर्मचारियों की संख्या करीब 9,000 है और अब इसमें से 6.6% लोगों की नौकरी चली गई है।

वेदांतू ने महीने में दो बार लोगों को नौकरी से निकाला
इससे पहले एजुकेशन टेक कंपनी वेदांतू (Vedantu) भी दो बार में सैकड़ों लोगों को नौकरी से निकाल चुकी है। मई महीने में ही कंपनी ने पहले 200 लोगों और फिर बुधवार को 424 लोगों की छंटनी (Vedantu Lay Offs) कर दी। कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या 5,900 के करीब है। पहली बार छंटनी को लेकर कंपनी ने कहा था कि उसने 120 कॉन्ट्रैक्टर्स और 80 फुल टाइम एम्प्लॉइज के कामकाज का आकलन करने के बाद ये फैसला किया।

Unacademy ने भी निकाले 600 लोग
इससे पहले अप्रैल में एक और एजुटेक कंपनी Unacademy ने भी 600 लोगों को नौकरी से निकाल दिया था। जबकि रॉनी स्क्रूवाला से निवेश पाने वाली स्टार्टअप कंपनी Lido Learning अपना ऑपरेशन बंद कर चुकी है और कई एम्प्लॉइज का कहना है कि Lido ने पिछले कई महीनों से वेतन नहीं दिया है। इसके अलावा Meesho, Furlenco और Trell जैसी कंपनी भी लोगों को नौकरी से निकाल चुकी है।

Netflix ने की 150 लोगों की छुट्टी
नौकरी से निकाले जाने की घटना सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल रही है। पॉपुलर OTT प्लेटफॉर्म Netflix ने भी करीब 150 कर्मचारियों और दर्जनों कॉन्ट्रैक्टर्स की छंटनी कर दी है।

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