आजकल ज्यादातर बैंक जनता को विभिन्न तरीकों से लूट रही है और जनता को पता ही नहीं चलता है। ज्यादातर बैंकों के फाइन का अलग से SMS नहीं आता है, आखिर क्यों? यदि 3 बार से ज्यादा दूसरी बैंकों के ATM से कैश निकालते है तो जो चार्ज लगता है, उसका अलग से मैसेज नहीं आता है। यदि आपके बैंक में 1000 है और चौथी बार निकाल रहे है तो जब तक उसके ऊपर फाइन के रुपये नहीं होंगे तब तक पैसे नहीं निकलते है। आखिर क्यों? फाइन तो बाद में लगना चाहिए, जब पैसे निकलेंगे, लेकिन चौथी बार निकालते वक्त ही फाइन का पैसा क्यों होना चाहिए?

अधिकतर ATM में केवल 500 के ही नोट
आज भी ज्यादातर ATM में केवल 500 के ही नोट होते है, जबकि 100 के नोट ज़रूरी है। यदि रात में किसी को रिक्शा इत्यादि को छुट्टा देना है तो लोगों को बड़ी दिक्कत होती है। और ATM कार्ड तो एक ही बार कई वर्षों के लिए देते हैं, लेकिन हर साल कार्ड का पैसा लेते है, आखिर क्यों?

मिनिमम बैलेंस के नाम पर मनमाना चार्ज
वहीं बैंक आजकल मिनिमम बैलेंस के नाम पर हर महीने मनमाना पैसा वसूल रही है, जबकि जितना फाइन लेती है, उसका नाममात्र भी ब्याज नहीं देती है। जबकि उनकी बैंक तो जनता के पैसे से ही चल रही है। मिनिमम बैलेंस के फाइन को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को तय कर देना चाहिए, जिससे वे जनता को ज्यादा लूट ना सके। एसएमएस, मिनिमम बैलेंस, कॉर्ड का चार्ज कभी भी काट लेती है, जिससे कभी भी लोगो के चेक बाउंस हो जाते है। इसका एक फिक्स्ड डेट होना चाहिए कि यह कब कटेगा और कौन-सी तारीख को कटेगा।

इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग के नाम पर वसूले जा रहे हैं पैसे
कई बार बैंकों की मिलीभगत की वजह से बैंक के स्टॉलमेंट के ठीक दिन ही यह फाइन काटा जाता है, जिससे दोनों बैंकों को फाइन मिलता है। आजकल इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग के नाम पर जनता को सबसे ज्यादा लुटा जा रहा है। आज जब किसी लोन या स्टालमेंट का चेक इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग के जरिए बैंक में आता है तो दो दिन में तीन बार चेक बाउंस करा लिया जाता है और दोनों तरफ की बैंक या फाइनेंस कंपनी तीन तीन बार चेक बाउंस का चार्ज लगा लेती है। जितने का चेक नहीं होता है, उससे ज्यादा फाइन हो जाता है। यदि बैंक में किसी कारण पैसा नहीं है तो तीन बार दो दिन में बाउंस कराने का क्या फायदा है? यह कमाने का तरीका बैंकों ने बना रक्खा है। यह बंद होना चाहिए। एक बार बाउंस होने के बाद बिना पार्टी से पूछे दूबारा क्लेरेंस के लिए चेक नहीं भेजना चाहिए।

कई बैंक और फाइनेंस कंपनी ऑनलाइन ऐप के जरिए कर रही ठगी
आजकल कई बैंक, फाइनेंस कंपनी ऑनलाइन ऐप के जरिए लोंगो को ठग रही है। ज्यादातर 10 हज़ार, 25 हज़ार या 50 हज़ार देकर 24%से 50 % ब्याज साल का वसूल रही है और ऊपर से प्रोसेसिंग फीस अलग से और ज्यादातर जनता इनके जाल में फंसती जा रही है। जो कि आगे चलकर बहुत बड़ा जी का जंजाल सरकार व लोगों के लिए बन सकता है। इसे सरकार व RBI को रोकना चाहिए या ब्याज दर तय करना चाहिए। आज जनता महंगाई व बेरोजगारी से परेशान है और कर्ज ले रही है, लेकिन यह बहुत बड़ा खतरा देश की जनता के लिए बन सकता है। और लोगों के आत्महत्या का कारण बन सकता है। समय रहते सरकार व RBI को जाग जाना चाहिए।

 संजय शर्मा ‘राज’

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